दिल्ली में सहकारी आंदोलन
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली, शहरीकृत होने के बावजूद एक सक्रिय और विविधतापूर्ण सहकारी क्षेत्र बना, भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम और जनसंख्या की दृष्टि से विरल क्षेत्र है। इसके बावजूद, इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में सहकारी समितियाँ जीविकोपार्जन, कृषि सहायता और सामुदायिक विकास का केंद्र है, विशेष रूप से शहरी आवास, क्रेडिट सोसाइटीज़ और उपभोक्ता सहकारी समितियों के क्षेत्र में। दिल्ली में सहकारी विकास, एक घनत्व-आधारित और सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप किया गया है।
सहकारी क्षेत्र की रूपरेखा
• दिल्ली की सहकारी समितियाँ दिल्ली सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2003 के अंतर्गत विनियमित होती हैं।
• यहाँ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक (UCBs) और क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जो वेतनभोगी वर्ग, स्वरोज़गार करने वालों, और छोटे व्यवसायों को सेवाएं प्रदान करती हैं।
संगठनात्मक संरचना
• पंजीयक सहकारी समितियाँ (दिल्ली) – पंजीकरण, अनुपालन और विवाद समाधान की निगरानी करता है।
• प्रमुख सहकारी समितियों के प्रकार:
o शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks)
o कर्मचारी क्रेडिट सोसाइटीज़ (Employee Credit Societies)
o आवासीय एवं समूह आवास समितियाँ (Housing and Group Housing Societies)
o उपभोक्ता सहकारी समितियाँ एवं स्टोर (Consumer Cooperatives and Stores)