हिमाचल प्रदेश में सहकारी आंदोलन
हिमाचल प्रदेश भारत के सहकारी इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है, क्योंकि यहाँ भारत की पहली सहकारी समिति की स्थापना 1892 में पंजवार गाँव में हुई थी, जो कि सहकारी समितियों अधिनियम के लागू होने से पहले की बात है। तब से यह आंदोलन राज्य के ग्रामीण विकास, वित्तीय समावेशन और कृषक सशक्तिकरण के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित हुआ है।
संगठनात्मक संरचना
हिमाचल प्रदेश में सहकारी ऋण प्रणाली दो-स्तरीय (Two-Tier) संरचना में संचालित होती है:
• राज्य स्तर:
o हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक (HPSCB): यह बैंक 238 शाखाओं और 24 विस्तार काउंटरों के माध्यम से कार्य करता है और अल्पकालिक व मध्यम अवधि के कृषि तथा ग्रामीण ऋण प्रदान करता है।
o हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (HPSCARDB): यह बैंक कृषि, बागवानी, ग्रामीण अवसंरचना और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए दीर्घकालिक निवेश ऋण उपलब्ध कराता है।
• ग्राम स्तर:
o प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS): ये समितियाँ ग्राम स्तर पर कार्यरत होती हैं और ऋण एवं सहकारी सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित करती हैं।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)
हिमाचल प्रदेश में PACS सहकारी बैंकिंग प्रणाली की आधारशिला हैं, जो मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों पर केंद्रित होती हैं:
• किसानों को अल्पकालिक और मध्यम अवधि के ऋण प्रदान करना
• बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण आदि जैसे इनपुट वितरित करना
• लघु किसानों को विपणन, प्रसंस्करण और बीमा सेवाओं से जोड़ना
• दुग्ध सहकारिताओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए समर्थन प्रणाली के रूप में कार्य करना
• कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल बैंकिंग पहलों को प्रोत्साहित करना
प्रमुख सहकारी संस्थाएँ
• हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक (HPSCB): राज्य में सहकारी बैंकिंग प्रणाली का नेतृत्व करने वाली संस्था
• HPSCARDB: कृषि और ग्रामीण अवसंरचना हेतु दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने वाला बैंक
• हिमाचल प्रदेश राज्य दुग्ध उत्पादक संघ (HPMilkfed): दुग्ध विकास को बढ़ावा देने वाली संस्था, जिसमें महिला केंद्रित भागीदारी भी प्रमुख है