लेह–लद्दाख में सहकारी आंदोलन
लेह–लद्दाख, जो वर्ष 2019 में जम्मू और कश्मीर से अलग होकर एक केंद्र शासित प्रदेश बना, भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम और जनसंख्या की दृष्टि से विरल क्षेत्र है। इसके बावजूद, इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में सहकारी समितियाँ जीविकोपार्जन, कृषि सहायता और सामुदायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संस्थाओं के रूप में लंबे समय से कार्य कर रही हैं।
संदर्भ और सहकारी समितियों की भूमिका
• कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कम जनसंख्या घनत्व और वाणिज्यिक बाजारों की सीमित पहुँच के कारण
लद्दाख में स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सहकारी समितियों पर भारी निर्भरता है।
• यह आंदोलन मुख्यतः
कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प, पश्मीना ऊन प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पादन और उपभोक्ता आपूर्ति श्रृंखलाओं में विकसित हुआ है।
संगठनात्मक संरचना
•
जिला स्तर की सहकारी समितियाँ, लद्दाख के पंजीयक सहकारी समितियाँ कार्यालय के अधीन कार्य करती हैं।
•
प्राथमिक सहकारी समितियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
o कृषि और बहुद्देश्यीय सहकारी समितियाँ
o भेड़ और ऊन विकास सहकारी समितियाँ
o महिला हथकरघा और हस्तशिल्प सहकारी समितियाँ
o ऋण और उपभोक्ता सहकारी समितियाँ
मुख्य विशेषताएँ
संकेतक |
विवरण |
कुल क्रियाशील सहकारी समितियाँ |
लगभग 200+ (केंद्र शासित प्रदेश स्तर की रिपोर्ट के अनुसार) |
कार्यक्षेत्र |
कृषि, दुग्ध उत्पादन, हस्तशिल्प, पर्यटन सहायता |
प्रमुख क्षेत्र |
पश्मीना ऊन, खुबानी खेती, जैविक उत्पादन |
प्रमुख फोकस |
जनजातीय सशक्तिकरण, टिकाऊ आजीविका |