क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान चंडीगढ़

हरियाणा में सहकारी आंदोलन

हरियाणा उत्तर भारत में सहकारी क्षेत्र की संरचना और सक्रियता में प्रमुख है। कृषि विकास, ग्रामीण ऋण, दुग्ध उत्पादन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में इसका मॉडल काफी प्रभावशाली रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1966 में हरियाणा राज्य गठन के बाद HARCO Bank की स्थापना हुई, जिससे मजबूत तीन-स्तरीय ऋण संरचना की नींव पड़ी। तब से सहकारी मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय पहुँच का एक मुख्य स्त्रोत बना हुआ है।

संरचनात्मक व्यवस्था

• राज्य स्तर: HARCO Bank (13 शाखाएँ + 2 विस्तार काउंटर) और Haryana State Cooperative Agriculture & Rural Development Bank (HSCARDB) – दीर्घकालीन कृषि व ग्रामीण विकास ऋण।
• जिला स्तर: 19 Central Cooperative Banks, 594–638 शाखाओं के माध्यम से सेवाएं।
• ग्राम स्तर: 773 PACS/PCCS/FSS (30 लाख से अधिक सदस्यों को सेवा प्रदान करते हुए)

प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)

हरियाणा में PACS सीधे किसानों को ऋण सुविधा, KCC, कृषि इनपुट, सरकारी योजनाओं एवं विपणन समर्थन उपलब्ध कराते हैं।

प्रमुख सहकारी संस्थाएं

• HARCO Bank – उत्कृष्ट अनुभव एवं परिचालन दक्षता के लिए जाना जाता है
• HSCARDB – दीर्घकालीन कृषि आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करता है
• Haryana Dairy Cooperative Federation – तीन-स्तरीय दुग्ध सहकारी संरचना संचालित करती है

पंजाब की प्रमुख सहकारी संस्थाएं

• PSCB – पंजाब का अग्रणी सहकारी बैंक
• Punjab State Cooperative Milk Producers’ Federation (MILKFED) – दुग्ध विपणन
• Punjab State Cooperative Supply & Marketing Federation (MARKFED) – कृषि इनपुट प्रबंधन
• PUNSUP – खाद्यान्न खरीद एवं वितरण
• Cooperative Sugar Mills & Consumer Federations – चीनी एवं उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन व विपणन